श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है भारतीय भाषा सम्मेलन

शेयर करे

संपादक पुरुषोत्तम खरोला हरिद्वार श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है भारतीय भाषा सम्मेलन

हरिद्वार। दिनाङ्क – 29 एवं 30 जनवरी 2026 को भारतीय भाषा समिति के आर्थिक अनुदान से श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार में “भारतीय भाषा सम्मेलन” का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय भाषाओं की समृद्ध परम्परा का स्वदेशी एवं सभ्यतामूलक दृष्टिकोण से शैक्षणिक विमर्श प्रस्तुत करना है।

यह सम्मेलन महाविद्यालय की प्रबन्धसमिति के अध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है, जिनके कुशल एवं सुदृढ़ नेतृत्व में यह महाविद्यालय भारतीय ज्ञान, विज्ञान एवं दर्शन परम्परा को निरन्तर प्रोत्साहित करता रहा है। यह सम्मेलन प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार जी के कुशल नेतृत्व एवं निर्देशन में सम्पन्न होगा। इस सम्मेलन में कार्यव्यवस्था का उत्तरदायित्व डॉ. मञ्जु पटेल एवं संयोजन डॉ. आशिमा श्रवण जी करेंगी।

देश के अनेक प्रतिष्ठित विद्वान्, प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं अनेक गणमान्य इसम सम्मेलन में प्रतिभाग कर रहें है। इस सम्मेलन में डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, (पूर्व केंद्रीयशिक्षामंत्री); डॉ. मनीष कुमार पाण्डेय, (कुलपति, फॉनिक्स विश्वविद्यालय, रुड़की); प्रो. एस.डी. शर्मा, (पूर्व कुलपति, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला); तथा प्रो. श्रवण के. शर्मा, (विज़िटिंग प्रोफेसर, नालन्दा विश्वविद्यालय, बिहार) उपस्थित रहेंगे। अन्य विशिष्ट अभ्यागतों में डॉ. रमेश कुमार पाण्डेय, (अखिल भारतीय अध्यक्ष, संस्कृत भारती); श्री दीपक गैरोला, (संस्कृत सचिव, उत्तराखण्ड) तथा अम्बर खरबन्दा, देहरादून भी इस सम्मेलन से सम्मिलित होंगे।

यह सम्मेलन औपनिवेशिक भाषावैज्ञानिक वर्गीकरण से परे जाकर भारतीय भाषाओं के साझा ध्वन्यात्मक, अर्थगत, सांस्कृतिक एवं सभ्यतामूलक आधारों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करेगा। इस सम्मेलन में “भारतीय भाषा परिवार” की समन्वित अवधारणा के माध्यम से भारत की भाषाई एकता एवं निरंतरता को विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा।

सम्मेलन के अंतर्गत उद्घाटन सत्र, तकनीकी सत्र, मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ तथा शोध-पत्र प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी। देशभर से विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता अपेक्षित है। आयोजकों का विश्वास है कि यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं एवं भाषिक विरासत पर राष्ट्रीय विमर्श को सशक्त दिशा प्रदान करेगी।