आचार्य भरतमुनि के रससूत्र को समझना अत्यावश्यक- डां रवीकान्त भारद्वाज

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आचार्य भरतमुनि के रससूत्र को समझना अत्यावश्यक- डां रवीकान्त भारद्वज

श्री भगवान दास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार में आनलाईन विशिष्ट व्याख्यान समायोजित किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में श्री कमलापति त्रिपाठी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चंदौली उत्तर प्रदेश के संस्कृत विभाग के सहायकाचार्य डॉ रविकांत भारद्वाज ने “काव्यप्रकाशदिशा रससूत्रविमर्श:” विषय पर अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि सबसे पहले हमें आचार्य भरत के रससूत्र को अच्छी तरह से समझना चाहिए इसके उपरान्त काव्यप्रकाश में निहित भट्टलोलट्ट, श्रीशङ्कुक, भट्टनायक, तथा श्री अभिनवगुप्तपादाचार्य के व्याख्या को समझना चाहिए। तदोपरान्त महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ . रवीन्द्र कुमार ने छात्रों को संबोधित किया तथा आनलाईन माध्यम से उपस्थित आचार्य का धन्यवाद् ज्ञापन भी किया। साथ ही साथ कार्यक्रम का संयोजन साहित्य विभाग के अतिथि सहायकाचार्य डॉ. सुमन्त कुमार सिंह किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की हिन्दी प्राध्यापिका डां. मञ्जु पटेल, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. आलोक सेमवाल, डां. अङ्कुर कुमार आर्य, श्री शिवदेव आर्य, डां. प्रमेश कुमार बिजल्वाण, डां श्रीकृष्ण चन्द्र शर्मा , डॉ. अंकुल कर्णवाल, श्री एम.नरेश भट्ट, योग प्रशिक्षक श्रीमनोज कुमार गिरि एवं श्री अतुल मैखुरी सहित महाविद्यालय के शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहे।