संपादक पुरुषोत्तम खरोला हरिद्वार होली 2026: चंद्रग्रहण की छाया में रंगों का पर्व हरिद्वार स्थित कल्याणी ज्योतिष केंद्र के संस्थापक पंडित सुमित प्रहलाद जी का कहना है कि इस वर्ष होली का पावन पर्व विशेष संयोग लेकर आ रहा है। 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और 3 मार्च को धुलेंडी (रंगोत्सव) मनाई जाएगी, किंतु इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी पड़ रहा है, जिसके कारण यह होली ग्रहण की छाया में मनाई जाएगी।
👉 ज्योतिषीय गणना के अनुसार 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से खग्रास चंद्रग्रहण आरंभ होगा और सायं 6:48 बजे समाप्त होगा। ग्रहण का सूतक काल मंगलवार प्रातः 6:20 बजे से प्रारंभ माना जाएगा। सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पूर्व आरंभ हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य, पूजन, मंदिर जाना तथा विशेष मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है।
👉 2 मार्च की रात्रि में होलिका दहन श्रद्धा और विधि-विधान से किया जाएगा। होलिका दहन का धार्मिक महत्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भक्तजन अग्नि की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों के नाश की कामना करेंगे।
👉 3 मार्च को धुलेंडी के दिन रंग-गुलाल के साथ उत्सव तो मनाया जाएगा, लेकिन चंद्रग्रहण के कारण विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता रहेगी। सूतक काल प्रारंभ होने के बाद होली पूजन नहीं करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करना, भोजन बनाना या ग्रहण करना, और मंदिरों में प्रवेश करना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता। ग्रहण समाप्ति के पश्चात स्नान, दान और मंत्रजप का विशेष महत्व बताया गया है।
हरिद्वार स्थित कल्याणी ज्योतिष केंद्र के संस्थापक पंडित सुमित प्रहलाद जी के अनुसार इस वर्ष की होली आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि ग्रहण काल में भगवान का स्मरण, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और गंगाजल से शुद्धि करना विशेष फलदायी रहेगा। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर घर और मंदिर की शुद्धि कर पुनः पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
इस प्रकार इस वर्ष की होली जहां एक ओर रंगों और उमंग का संदेश देगी, वहीं दूसरी ओर चंद्रग्रहण का योग हमें आध्यात्मिक साधना और सावधानी का भी संकेत दे रहा है। श्रद्धा, संयम और शास्त्रीय मर्यादा के साथ मनाई गई होली जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।


