श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित हुआ संस्कृत सप्ताह का चतुर्थ दिवस

शेयर करे

श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित हुआ संस्कृत सप्ताह का चतुर्थ दिवस

संपादक पुरुषोत्तम खरोला हरिद्वार। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय द्वारा आयोजित किए जा रहे सात दिवसीय ‘संस्कृत सप्ताह महोत्सव’ के चतुर्थ दिवस पर भारतीय ज्ञान परम्परा, वैदिक संस्कृति एवं सनातन मूल्यों से ओत-प्रोत अत्यन्त दिव्य एवं गरिमामय अनुष्ठान का आयोजन किया गया।

महोत्सव के चतुर्थ दिवस पतितपावनी माँ भागीरथी (गङ्गा) के पुण्य पावन तट पर भारतीय ज्ञान विज्ञान की प्राचीन परंपरा में वर्णित ‘श्रावणी उपाकर्म’ का शास्त्रीय विधि-विधान के साथ आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर महाविद्यालय के अनेक बटुक छात्रों का नूतन यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न कराया गया तथा उन्हें वैदिक धर्म, अनुशासन और स्वाध्याय के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया गया।

अनुष्ठान में यज्ञाचार्य एवं ‘ब्रह्मत्व’ का निर्वहण वेदान्त एवं कर्मकाण्ड के मूर्धन्य विद्वान डॉ. आलोक कुमार सेमवाल ने किया। उन्होंने अत्यंत सूक्ष्मता एवं विधि-विधान से यज्ञमण्डप में ब्रह्मा के आसन पर विराजमान होकर कर्मकाण्ड का सञ्चालन करवाया।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. रवीन्द्र कुमार ने यज्ञोपवीत संस्कार के आध्यात्मिक पक्ष के साथ-साथ इसकी आधुनिक वैज्ञानिकता पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “यज्ञोपवीत केवल तीन धागों का सूत्र नहीं है, अपितु यह देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण से मुक्ति तथा आत्म-नियन्त्रण का दिव्य सङ्कल्प है। यज्ञोपवीत संस्कार छात्र जीवन में अनुशासन, सत्यनिष्ठा, ब्रह्मचर्य और वैदिक धर्म के सिद्धांतों पर चलने की प्रेरणा देता है। इसका धारण मनुष्य को द्विजत्व प्रदान करता है, जिससे ज्ञान और विवेक के नए मार्ग खुलते हैं।”

उपाकर्म अनुष्ठान के उपरान्त सभी छात्रों को गायत्री मन्त्र का जाप कराया गया और सूर्योपस्थान के साथ यज्ञाहूति दी गई। सभी विद्यार्थियों ने सङ्कल्प लिया कि वे प्रतिदिन सन्ध्यावन्दन, स्वाध्याय एवं वैदिक मूल्यों का पालन करेंगे। उपाकर्म अनुष्ठान के उपरान्त सभी को प्रसाद वितरित किया गया तथा शान्तिपाठ के साथ आज का कार्यक्रम समाप्त किया गया।