श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित हुआ संस्कृत सप्ताह का तृतीय दिवस
संपादक पुरुषोत्तम खरोला हरिद्वार। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित सात दिवसीय ‘संस्कृत सप्ताह’ के तृतीय दिवस के अवसर पर एक विशेष बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. आशिमा श्रवण ने अपने विस्तृत और शोधपरक व्याख्यान से उपस्थित विद्वानों एवं विद्यार्थियों को गहराई से प्रभावित किया।
डॉ. आशिमा श्रवण का व्याख्यान संस्कृत साहित्य की वैश्विक उपादेयता, आधुनिक तकनीकी अंतर्संबंध एवं व्यावहारिक प्रासंगिकता विषय पर केंद्रित रहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत के न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रभाव मानसिक एकाग्रता को बढ़ाते हैं और तनाव को कम करते हैं। संस्कृत का नियमित उच्चारण मस्तिष्क की स्मरण शक्ति को मजबूत करता है। डा. आशिमा ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद, खगोल शास्त्र, वैदिक गणित, पर्यावरण संरक्षण और वास्तु कला का मूल ज्ञान संस्कृत ग्रंथों में ही सुरक्षित है। यदि आधुनिक शोधार्थी संस्कृत भाषा का सम्यक् ज्ञान प्राप्त करें, तो वे इन प्राचीन सिद्धांतों के आधार पर नए वैज्ञानिक अनुसंधान कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत को केवल एक विषय के रूप में न पढ़कर जीवन दर्शन और ज्ञान-विज्ञापिका के रूप में अपनाएं। संस्कृत को रोजगार, शोध और प्रौद्योगिकी का माध्यम बनाना समय की मांग है।
कार्यक्रम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए समन्वयक डॉ. रवीन्द्र कुमार ने संस्कृत भाषा के संरक्षण में इस प्रकार के आयोजनों को मील का पत्थर बताया। वहीं कार्यक्रम के कुशल संचालक डॉ. लिखित शर्मा ने अपनी ओजस्वी शैली में मुख्य वक्ता के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए मंच को अंत तक ऊर्जामयी बनाए रखा।
सत्र के अंत में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान मुख्यवक्ता द्वारा किया गया। राष्ट्रगान और शांति पाठ के साथ तृतीय दिवस के इस बौद्धिक कार्यक्रम का समापन हुआ।


