परिवार से बिछड़े व्यक्ति को पहुंचाया उसके घर..परिवार में छाई ख़ुशी की लहर

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परिवार से बिछड़े व्यक्ति को पहुंचाया उसके घर..परिवार में छाई ख़ुशी की लहर

 संपादक पुरुषोत्तम खरोला हरिद्वार बरेली।  14 अक्टूबर को शाम लगभग 05:30 बजे कर्मचारी नगर,केसर वाटिका, बरेली में एक व्यक्ति बदहवास एवं असहाय अवस्था में घूमता हुआ मिला। प्रयास सहयोग समिति के कोषाध्यक्ष मदन लाल शर्मा को इसकी जानकारी होने पर वे सचिव पंकज भट्ट को लेकर वहां पहुंचे। बांग्ला-भाषी होने के कारण व्यक्ति की बात किसी को समझ में नहीं आ रही थी इसलिए उसके बारे में,नाम के अलावा और कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में सचिव पंकज भट्ट की बंग-भाषा की जानकारी बहुत काम आई। उन्होंने बांग्ला भाषा में जब उस व्यक्ति से बात की तो उसकी पहचान मदन किस्कू पुत्र श्री श्याम किस्कू निवासी ग्राम पाथर काटा,थाना ओंडा,ज़िला बांकुड़ा (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई उसकी जेब से 12 अक्टूबर का जनरल रेलवे टिकट,जो दुर्गापुर से जालंधर का था,भी मिला। टिकट के संबंध में पूछने पर उसने बताया कि वह मजदूरी करने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ जालंधर जा रहा था।रास्ते में बरेली जंक्शन पर पानी लेने उतरा और फिर ट्रेन में न बैठ पाने के कारण अपने साथियों से बिछड़ कर भटक गया यह जानकारी मिलते ही थाना ओंडा का फोन नंबर निकाल कर वहां बात करके पूरी स्थिति बताई गई और उनको भटके हुए व्यक्ति का फोटो भी भेजा गया।थाने द्वारा मदन किस्कू के पुत्र को अवगत कराया गया कि उनके पिता बरेली में “प्रयास” संस्था के संपर्क में हैं।थाने द्वारा श्री मदन शर्मा का मोबाइल नंबर भी उनके पुत्र को दिया गया। उनके पुत्र का कल सुबह संस्था के पास धन्यवाद का फोन आया और उन्होंने बताया कि आपके द्वारा पिताजी के विषय में पता चलने पर मैंने उनके साथ सफर कर रहे लोगों को पूरी बात बताई और वो लोग तुरंत बरेली वापस चले गए और पिताजी को साथ लेकर अब लौट रहे हैं संस्था लगातार उनके संपर्क में बनी रही और ज्ञात हुआ कि वो कल दोपहर को सुरक्षित अपने घर पहुंच गए हैं। परिवार में खुशी छाई है और मदन किस्कू का पूरा परिवार “प्रयास सहयोग सेवा समिति” के इस पुनीत कार्य के लिए संस्था को धन्यवाद देता नहीं थक रहा है बताते चलें कि “प्रयास सहयोग सेवा समिति” बरेली की एक प्रतिष्ठित समाज-सेवी संस्था है और विगत तेरह वर्ष से इसके अनेकों सदस्य समाज और मानव मात्र की सेवा के लिए,बिना किसी स्वार्थ और भेद-भाव के,निशि-दिन कृत-संकल्प और समर्पित हैं